आलेख,
कहानी
समीक्षा
रचनाएं आमंत्रित
गजलें
गीत
कविता
कविता
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
कविता
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
मंगलवार, 12 जुलाई 2016
हाथ पसारे क्यों खड़े हैं
सुरेश सर्वेद
हमारे घर बड़े भइया आये
मुझे समझाये -
'' मैं फलां छाप में खड़ा हू
मैं तुमसे बड़ा हूं
अत: सपरिवार
वोट मुझे देना
आड़े हाथ मत लेना
मैंने कहा - भाई साहब,
आप मुझसे बड़े हैं
फिर हाथ पसारे
क्यों खड़े हैं।
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)